Mahatma Gandhi Biography in Hindi / महात्मा गांधी जी जीवनी हिंदी में 2020

 

Mahatma Gandhi Biography in Hindi Pdf महात्मा गांधी के नाम से मशहूर मोहनदास करमचंद गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक नेता थे।

 

 

 

सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों पर चलकर उन्होंने भारत को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  इन्ही  सिद्धांतों ने पूरी दुनिया में लोगों को नागरिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरित किया।

 

 

 

 

सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1944 में रंगून रेडियो से गांधीजी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कह कर संबोधित किया था महात्मा गांधी पूरी मानव जाति के लिए एक मिसाल है।

 

 

 

Mahatma Gandhi Biography In Hindi Pdf Free Download

 

 

 

उन्होंने हर परिस्थिति में अहिंसा एवं सत्य का पालन किया इसका पालन करने के लिए कहा।  उन्होंने अपना पूरा  जीवन सदाचार में गुजारा  था। महात्मा गांधी जी सदैव पारम्परिक परिधान पहनते थे और शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करते थे और आत्मशुद्धि के लिए कई बार लम्बे उपवास भी रखे।

 

 

 

मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म भारत में गुजरात के शहर पोरबंदर में 2 अक्टूबर सन 1869 को हुआ था।  उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था और वे ब्रिटिश राज्य के समय कठियावाड़ की एक छोटी सी रियासत पोरबंदर के दीवान थे।

 

 

 

महात्मा गांधी का जीवन परिचय

 

 

पूरा नाम           – मोहनदास करमचंद गांधी।

 

पिता का नाम   – पुतलीबाई।

 

पत्नी का नाम    – कस्तूरबा गांधी।

 

पुत्र का नाम       – हरिलाल गांधी, मणिलाल गांधी, रामदास गांधी, देवदास गांधी।

 

प्रारम्भिक शिक्षा – पोरबंदर, गुजरात।

 

जन्मदिन              – 2 अक्टूबर सन 1869

 

मृत्यु                        – ३०  जनवरी १९४८

 

 

Mahatma Gandhi Biography in Hindi in Short

 

 

 

मोहनदास  की माता पुतलीबाई परनामी वैश्य समुदाय से ताल्लुक रखती थी और अत्यधिक धार्मिक प्रवृति की थी।  मोहनदास गांधी पर अपनी माता का विशेष प्रभाव हुआ।

 

 

 

इन्हीं मूल्यों ने आगे चलकर उनकी जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  वह नियमित रूप से व्रत रखती थी और परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर उसकी सेवा में दिन रात एक कर देती थी।

 

 

 

मोहनदास ने स्वाभाविक रूप से अहिंसा,  शाकाहार,  आत्म शुद्धि के लिये परस्पर सहिष्णुता को अपनाया।   सन १८८३ में साढ़े  तेरह वर्ष की उम्र   में ही उनका विवाह 14 साल की कस्तूरबा के साथ हो गया।

 

 

 

 

जब मोहनदास 15 वर्ष के थे तब उनकी पहली संतान में जन्म लिया कुछ ही दिन जीवित रही।  इसी वर्ष सं १८८५ उनके पिता करमचंद गांधी का स्वर्गवास हो गया।

 

 

 

बाद में मोहनदास और कस्तूरबा के चार संतान हुई… जिनका नाम क्रमशः हरीलाल गांधी,  मणिलाल गांधी,  रामदास गांधी और  देवदास गांधी रखा गया।

 

 

 

Life Story Of Mahatma Gandhi in Hindi Language

 

 

 

गांधीजी की  मिडिल स्कूल की शिक्षा पोरबंदर में और हाईस्कूल की शिक्षा राजकोट में हुई।  शैक्षणिक स्तर पर मोहनदास एक औसत छात्र ही रहे। सन  १८८७  में मैट्रिक की परीक्षा अहमदाबाद से उत्तीर्ण की इसके बाद मोहनदास ने भावनगर के शामल  दास कॉलेज में दाखिला लिया।

 

 

 

 

खराब स्वास्थ्य से वे परेशान रहे और कॉलेज छोड़कर पाेरबंदर वापस चले गए। मोहनदास अपने परिवार में अब तक सबसे ज्यादा पढ़े लिखे थे। इसके लिए उनके परिवार वाले ऐसा मानते थे कि वह अपने पिता और चाचा का उत्तराधिकारी दीवान बन सकते हैं।

 

 

 

 

 

उनके एक पारिवारिक मित्र मावजी दवे ऐसी सलाह दी कि एक बार  मोहनदास लंदन से बैरिस्टर बन जाए तो उनको आसानी से दीवान की पदवी मिल सकती है।

 

 

Mahatma Gandhi Biography in Hindi Written

 

 

 

 

उनकी माता पुतलीबाई और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनके विदेश जाने के विचार का विरोध किया पर मोहनदास के आश्वासन पर राजी हो गए।  वर्ष 1888 में मोहनदास लंदन में कानून की पढ़ाई करने  चले गए।

 

 

 

 

अपनी मां को दिए वचन अनुसार उन्होंने लंदन में अपना वक्त गुजारा।  शुरुआत में उन्हें  शाकाहारी खाने से संबंधित बहुत कठिनाई हुई और शुरुआती दिनों में कई बार भूखे ही रहना पड़ा।

 

 

 

Mahatma Gandhi Biography In Hindi Pdf Download

 

 

 

धीरे-धीरे उन्होंने शाकाहारी भोजन वाले पता लगा लिया और उसके बाद उन्होंने  वेजेटेरियन सोसाइटी की सदस्यता ली।  इस सोसाइटी की कुछ सदस्य थियोसोफिकल सोसायटी के सदस्य भी थे और उन्होंने मोहनदास को गीता पढ़ने का सुझाव दिया।

 

 

 

 

जून १८९१  में गांधी भारत लौट आये  और वहां जाकर उन्हें अपनी मां की मौत के बारे में पता चला।  उन्होंने मुंबई में वकालत की शुरुआत की पर उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिली।

 

 

 

 

इसके वे बाद राजकोट चले गए जहां उन्होंने जरूरतमंदों के लिए मुकदमे की अर्जियां लिखने का कार्य शुरू किया। परंतु कुछ समय बाद उन्हें यह काम भी छोड़ना पड़ा। आखिरकार 1793 में एक भारतीय फर्म से अफ्रीका में 1 वर्ष के पर वकालत का कार्य स्वीकार कर लिया।

 

 

 

गांधीजी 24 वर्ष की उम्र में दक्षिण अफ्रीका पहुंचे वह प्रिटोरिया स्थित  कुछ भारतीय व्यापारियों के न्यायिक सलाहकार के तौर पर वहां गए थे।  उन्होंने अपने जीवन के २१ साल  साल दक्षिण अफ्रीका में बिताए जहां उनके राजनीतिक विचार और नेतृत्व कौशल का विकास  हुआ।

 

 

 

 

दक्षिण अफ्रीका मैं उन्हें गंभीर नस्ली भेदभाव का सामना करना पड़ा।  एक बार प्रथम श्रेणी के  ट्रेन कोच की टिकट होने के बाद भी  तीसरी श्रेणी के डिब्बे में जाने से इंकार करने के कारण उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया।

 

 

 

महात्मा गांधी के बारे में जानकारी

 

 

 

यह सभी घटनाएं उनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़  बनीं  और मौजूदा सामाजिक और राजनैतिक अन्याय के प्रति जागरूकता का कारण बनीं। दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों पर हो रहे अन्याय को देखते हुए उनके मन में ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत भारतीयों के सम्मान तथा स्वयं अपनी पहचान से संबंधित प्रश्न उठने लगे।

 

 

 

 

 

दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी अपनी राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।  उन्होंने भारतीयों की नागरिकता संबंधी मुद्दे को भी दक्षिण अफ्रीकी सरकार के सामने उठाया और सन १९०६ के जुलू  युद्ध में भारतीयों को भर्ती करने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों को सक्रिय रूप से प्रेरित किया।

 

 

 

 

गांधीजी के अनुसार अपनी नागरिकता के दावों  को कानूनी जामा पहनाने के लिए भारतीयों को ब्रिटिश युद्ध प्रयासों में सहयोग देना चाहिए।  1914 में गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौटे।

 

 

 

 

इस समय तक  गांधी एक राष्ट्रवादी नेता और संयोजक के रूप में प्रतिष्ठित हो चुके थे। वह उदारवादी कांग्रेस नेता गोपाल कृष्ण गोखले के कहने पर भारत आए थे।

 

 

 

 

प्रारंभ मैं गांधीजी देश के विभिन्न भागों का दौरा किया और राजनीतिक आर्थिक और सामाजिक मुद्दे को समझने की कोशिश की।  बिहार के चंपारण और गुजरात के खेड़ा में हुए आंदोलनों ने गांधीजी को भारत में पहली राजनैतिक  सफलता दिलाई।

 

 

 

 

चंपारण मैं ब्रिटिश जमीदार किसानों को खाद्य फसलों की बजाय नील की खेती करने के लिए मजबूर करते थे और उनसे  से सस्ते दामों में फसल खरीदते थे।

 

 

 

Mahatma Gandhi Biography in Hindi Wikipedia

 

 

 

इस कारण  किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही थी।  एक विनाशकारी अकाल के बाद ब्रिटिश  सरकार  ने एक दमनकारी कर किसानों पर लगा दिया।  जिससे उनका बोझ  प्रतिदिन बढ़ता ही गया।  कुल मिलाकर स्थिति बहुत मिला निराशाजनक हो चुकी थी।

 

 

 

 

गांधीजी ने जमीदारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, हडतालों  का नेतृत्व किया और इसके बाद किसानों की बात मानी  गई।  सन १९१८ में गुजरात स्थित  खेड़ा बाढ़ और सूखे की चपेट में आ गया और  गरीबों की स्थिति बदतर हो गई।

 

 

 

 

खेड़ा में गांधी जी के मार्गदर्शन में सरदार पटेल ने अंग्रेजों के साथ इस समस्या पर विचार विमर्श के लिए किसानों का नेतृत्व किया।  इसके बाद अंग्रेजों ने राजस्व संग्रहण से मुक्ति देकर सभी कैदियों को रिहा कर दिया।

 

 

 

 

चंपारण और खेड़ा के बाद गांधीजी की ख्याति देश भर में फैल गई और वह स्वतंत्रता आंदोलन के एक महत्वपूर्ण नेता के रूप में उभरे। कांग्रेस के अंदर और मुस्लिमों के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ाने का मौका गांधीजी को खिलाफत आंदोलन के जरिए मिला।

 

 

 

 

खिलाफत एक विश्वव्यापी आंदोलन था जिसके द्वारा खलीफा के गिरते प्रभुत्व का विरोध सारी दुनिया के मुसलमानों द्वारा किया जा रहा  था।  प्रथम विश्व में पराजित होने के बाद ऑटोमन विखंडित कर दिया गया था।

 

 

 

जिसके कारण मुसलमानों को अपने धर्म  के प्रति असुरक्षा की भावना आ गयी थी।   भारत में खिलाफत ऑल इंडिया मुस्लिम कॉन्फ्रेंस द्वारा किया जा रहा था।

 

 

 

 

धीरे – धीरे  गांधीजी इसके मुख्य प्रवक्ता बन गए।  भारत के मुसलमानों के  साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए उन्होंने अंग्रेजों द्वारा दिए गए सम्मान और मेडल वापस कर दिए।

 

 

 

Very Short Mahatma Gandhi Biography in Hindi

 

 

 

इसके बाद गांधीजी न सिर्फ कांग्रेस बल्कि देश के एकमात्र ऐसे नेता बन गए जिसका प्रभाव विभिन्न समुदाय के लोगों पर था। गांधीजी का मानना था कि भारत में अंग्रेजों की घुसपैठ  भारतीयों के सहयोग से ही संभव हो पाई थी और अगर हम सब मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ हर बात पर  असहयोग करें तो आजादी संभव है।

 

 

 

 

बढ़ती लोकप्रियता ने उन्हें कांग्रेस का सबसे बड़ा नेता बना दिया था और अब वह इस  स्थिति में थे कि अंग्रेजों के विरुद्ध और असहयोग, अहिंसा तथा शांतिपूर्ण अधिकारों का प्रयोग कर सकें।

 

 

 

 

इसी बीच जलियांवाला नरसंहार ने देश को  झकझोर दिया।  जिससे जनता में क्रोध और हिंसा की ज्वाला भड़क उठी थी।  स्वदेशी नीति का आह्वान किया जिसमें विदेशी वस्तुओं विशेषकर अंग्रेजी वस्तुओं का बहिष्कार करना था।

 

 

 

गांधी जी का कहना था कि सभी भारतीय अंग्रेजों द्वारा बनाए गए वस्त्रों की अपेक्षा हमारे अपने लोगों द्वारा बनाए गए खादी  को पहने। पुरुषों और महिलाओं को प्रतिदिन सूत कातने के लिए कहा गया।

 

 

 

 

इसके अलावा महात्मा गांधी ने  ब्रिटेन की शैक्षणिक संस्थाओं और अदालतों   बहिष्कार,  सरकारी  नौकरियों को छोड़ने तथा अंग्रेजी सरकार से मिले सम्मान को वापस लौटाने  का भी अनुरोध किया।

 

 

 

 

असहयोग आंदोलन को अपार सफलता मिल रही जिससे देश के सभी वर्गों में जोश और भागीदारी बढ़  गई लेकिन फरवरी 1922 में इसका अंत चौरी चौरा  की घटना  के बाद हो गया।

 

 

 

 

चौरी चारा के  बाद गांधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया और इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया जिसमें उन्हें 6 साल की कैद की सजा सुनाई गई।

 

 

 

 

खराब स्वास्थ्य के चलते उन्हें फरवरी 1924 में सरकार ने रिहा कर दिया।   फरवरी 1924 में रिहा होने के बाद  सन 1928 तक गांधीजी   सक्रिय राजनीति से दूर ही रहे।

 

 

 

 

इस दौरान स्वराज पार्टी और कांग्रेस के बीच मनमुटाव को कम करने में लगे रहे और इसके अतिरिक्त देश भर में अज्ञानता और गरीबी के खिलाफ लड़ते रहे।

 

 

 

 

इसी बीच अंग्रेजी  सरकार ने सर जॉन साइमन के नेतृत्व में भारत के लिए एक नया संवैधानिक सुधार आयोग बनाया। उसका एक भी सदस्य भारतीय नहीं था जिसके कारण भारतीय राजनीतिक दलों ने इसका बहिष्कार किया।

 

 

 

 

इसके पश्चात दिसंबर 1928 के कलकत्ता अधिवेशन में अंग्रजी सरकार  को भारतीय साम्राज्य  को सत्ता प्रदान करने के लिए कहा और ऐसा न करने पर देश की आजादी के लिए असहयोग आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहने के लिए भी कहा।

 

 

 

 

अंग्रेजों द्वारा कोई जवाब नहीं मिलने पर  ३१ दिसंबर  १९२९  को लाहौर में भारत का झंडा फहराया गया और कांग्रेस ने 26 जनवरी 1930 का दिन भारतीय स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया .

 

 

 

 

इसके पश्चात गांधीजी ने सरकार द्वारा नमक पर कर लगाए जाने के विरोध में नमक सत्याग्रह चलाया जिसके अंतर्गत उन्होंने 12 मार्च से 6 अप्रैल तक अहमदाबाद से दांडी  तक लगभग ३८८  किलोमीटर की यात्रा की .

 

 

 

 

 

इस यात्रा का उद्देश्य स्वयं नमक उत्पन्न करना था।   इस यात्रा में हजारों की संख्या में भारतीयों ने भाग लिया और अंग्रेजी सरकार को विचलित करने में सफल रहे।

 

 

 

 

इस दौरान अंग्रेजी सरकार ने लगभग ६० हजार से अधिक लोगों को जेल भेजा।   इसके बाद लॉर्ड इरविन के गांधी जी के साथ विचार विमर्श करने का निर्णय लिया और फल स्वरुप गांधी इरविन संधि पर मार्च 1931 में हस्ताक्षर  हुए।

 

 

 

 

उसके बाद   ब्रिटिश सरकार ने सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने के लिए सहमत देदी।   इसके बाद  गांधी जी कांग्रेस के एकमात्र एकमात्र सदस्य के रूप में  लंदन में आयोजित गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया  परंतु यह सम्मेलन कांग्रेस और दूसरे राष्ट्र वादियों के लिए घोर निराशाजनक रहा।

 

 

 

 

 

उसके बाद  गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया और सरकार ने राष्ट्रवादी आंदोलन को कुचलने की कोशिश की।  1934 में गांधी जी ने कांग्रेस की सदस्यता से हटकर राजनैतिक गतिविधियों के स्थान पर अब रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से सबसे निचले स्तर से राष्ट्र के निर्माण पर अपना ध्यान लगाया।

 

 

 

 

उन्होंने ग्रामीण भारत को शिक्षित करने, छुआछूत के खिलाफ आंदोलन जारी रखने, कताई बुनाई और अन्य कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने और लोगों को की आवश्यकताओं  अनुकूल शिक्षा प्रणाली बनाने का काम शुरू किया।

 

 

 

 

द्वितीय विश्वयुद्ध में गांधीजी  अंग्रेजों को अहिंसात्मक नैतिक सहयोग देने के पक्षधर थे परंतु कांग्रेस के बहुत से नेता इस बात से नाखुश थे कि देश की जनता के प्रतिनिधियों की परामर्श किए बिना हीअंग्रेजी  सरकार ने देश को युद्ध में झोंक दिया था।

 

 

 

 

गांधी जी ने घोषणा की कि एक तरफ भारत को आजादी देने से इनकार किया जा रहा है  और दूसरी तरफ युद्ध में जीत  के लिए भारत को युद्ध में शामिल किया जाता है।

 

 

 

 

उसके बाद गांधी जी और कांग्रेस ने भारत छोड़ो आंदोलन की मांग कर दिया।  भारत छोड़ो आंदोलन स्वतंत्रता आंदोलन के अब तक के सभी आन्दोलनों से  शक्तिशाली आंदोलन बन गया जिसमें व्यापक हिंसा और गिरफ्तारी हुई।

 

 

 

Very Short Mahatma Gandhi Biography in Hindi

 

 

 

इस संघर्ष में हजारों की संख्या में स्वतंत्रता सेनानी या तो मारे गए या घायल हो गए और हजारों की संख्या में गिरफ्तार किये गए।  गांधी जी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि अंग्रेजी   प्रयासों को समर्थन तब तक नहीं देंगे जब तक भारत को तत्काल आजादी न दे दी जाए।

 

 

 

 

व्यक्तिगत हिस्सा के बावजूद  आंदोलन बंद नहीं होगा।  गांधी जी ने सभी कांग्रेसियों और भारतीयों को अहिंसा के साथ करो या मरो के साथ अनुशासन बनाए रखने को कहा था।

 

 

 

अंग्रेजी सरकार ने भारत गांधी जी और कांग्रेस कार्यकारिणी समिति के सभी सदस्यों को मुंबई में 9 अगस्त 1942 को गिरफ्तार कर लिया  और गांधी जी को पुणे केआंगा खां महल में ले जाया गया।

 

 

 

 

जहां गांधी जी को 2 साल तक बंदी बनाकर रखा गया।  इन्हीं दो वर्षों के दौरान कस्तूरबा  गांधी का देहांत 22 फरवरी 1944 को हो गया और कुछ समय बाद गांधी जी भी  मलेरिया से पीड़ित हो गए।

 

 

 

 

अंग्रेज गांधी जी को इस हालत में जेल में नहीं छोड़ सकते थे अतः उपचार के लिए 6 मई 1944 को उन्हें रिहा कर दिया गया। उधर भारत छोडो आंदोलन ने भारत को संगठित कर दिया था  और द्वितीय विश्व युद्ध के अंत तक ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया कि जल्द ही सत्ता भारतीयों के हाथ में सौंप दी जाएगी।

 

 

 

 

इसके बाद  सरकार ने लगभग एक लाख राजनैतिक कैदियों को रिहा कर दिया।  भारत की आजादी के आंदोलन के साथ-साथ मोहम्मद अली जिन्ना  के नेतृत्व में एक अलग मुसलमान बाहुल्य देश पाकिस्तान की मांग तेज हो गई थी।

 

 

 

 

४० के दशक में इन ताकतों ने  पाकिस्तान की मांग को वास्तविकता में बदल दिया था गांधी जी देश का बंटवारा नहीं चाहते थे क्योंकि यह उनके धार्मिक एकता के सिद्धांत के बिल्कुल अलग था पर ऐसा होना पाया और अंग्रेजों ने देश को दो भारत और पाकिस्तान   में विभाजित कर दिया।

 

 

 

३०  जनवरी १९४८  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की दिल्ली के बिड़ला  हाउस में शाम 5:17  पर  कर दी गई।  उस समय गांधीजी एक प्रार्थना सभा को संबोधित करने जा रहे थे जब उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे ने उनके सीने में तीन गोलियां दाग दी।

 

 

 

माना जाता है कि हे राम उनके मुख से निकले अंतिम शब्द। थे  नाथूराम गोडसे और उनके सहयोगी पर मुकदमा चलाया गया और और 1949 में उन्हें मौत की की सजा दी गयी।

मित्रों यह जानकारी Mahatma Gandhi Biography in Hindi आपको कैसी लगी जरुर बताएं और Mahatma Gandhi Biography in Hindi Written के लिये इस ब्लॉग को सबस्क्राइब जरुर करें और दूसरी पोस्ट नीचे की लिंक पर पढ़ें.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *